उद्बबोध
कौन कहता है कि तुम जीव हो? कौन कहता है कि तुम बद्ध हो? कौन कहता है कि तुम अपने कर्मो का फल भोगने के लिए जन्म लेते हो और फल भोगने के लिए कर्म करते हो?
ये सारी बातें तुमने जिन शास्त्रों, वेदों, उपनिषदों मे पढी़ हैं, उन्हीं मे आगे और पढो़। आगे भी लिखा है कि तुम ईश्वर अंश हो, उससे आगे ये भी लिखा है कि तुममें और ईश्वर मे मात्र एक अ का अंतर है यानि अज्ञान और ज्ञान का । और आगे पढो़, लिखा है तुम स्वयं ईश्वर ही हो ।
और पढो़ आगे लिखा है यह स्ंपूर्ण जगत तुम्हारा ही विनोद है।
तुम्हारे दुख का कारण कोई ईश्वर कोई जगत कोई कर्म कोई कर्म फल नहीं, केवल तुम्हारा अज्ञान है ।
उठो,
जागो
आत्मनिष्ठ होओ
अमरत्व को प्राप्त होकर निर्भय हो जाओ ।
ॐनमो नारायण
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