रामचरितमानस
जगत प्रकाश प्रकाशक रामू।
माया धीस ज्ञान गुन धामू।।
"जगत प्रकाश ":-
ये सारा जगत क्या है इंद्रियों का विषय है। पांचों इंद्रियों के पांच विषयों का समूह है जगत। शब्द, स्पर्श, रूप -रंग , रस , और गंध इनका अनुभव होता है कान, त्वचा, आंख, जिह्वा और नाक से।
लेकिन केवल इंद्रियां और विषयों का संयोग ही कारण नहीं है। मुख्य हैं चेतना , चैतन्यता, ज्ञान बोध।
जिसके उपस्थिति में ही इंद्रियां मन बुद्धि और चित्त संचालित होते हैं। यदि चेतना न हो तो शरीर और इंद्रियों के संपर्क का आभास किसे होगा?
माया धीस:-माया पर आधिपत्य है जिसका
लेकिन ये माया है क्या?
नारायण! यदि धृष्टता लगे तो क्षमा कीजिएगा।
काई का जन्म जल में जल के कारण ही होता है और वही काई जल को ढककर जल में ही सिद्ध होती है।
बादल का जन्म आकाश में ही होता है और बादल आकाश को ढककर अपने अस्तित्व को सिद्ध करता है।
माया भी ब्रह्म में ही उत्पन्न होकर ब्रह्म को ढककर स्वयं को सिद्ध करती है। एक सच्चाई कहूं! ईश्वर भी बिना माया के सिद्ध नही हो सकते। और जीव भी नही।फर्क केवल इतना है कि ईश्वर के अधीन माया है। और माया के अधीन जीव है।
इसलिए कहा माया धीस"ज्ञान" गुन धामू
अर्थात ज्ञान रुपी गुन के धाम हैं जो राम
ये भक्ति सिद्धांत है।
अद्वैत मत ज्ञान को ही ब्रह्म रूप में स्वीकार करता है। प्रज्ञानंब्रह्म।
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